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झारखंड-बिहार प्रदेश के किशनगंज जिले में 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सात दिवसीय संस्कार शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का मुख्य उद्देश्य बच्चों को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान एवं उत्तम संस्कारों से जोडऩा था।
शिविर में प्रतिदिन प्रार्थना, माला जाप, श्लोक उच्चारण एवं श्रीमद्भगवद्गीता के सरल पाठ का अभ्यास कराया गया। बच्चों को सनातन धर्म के संस्कार, बड़ों का सम्मान, अनुशासन, नम्रता तथा सभी जीवों के प्रति दया भाव रखने जैसी महत्वपूर्ण शिक्षाएं दी गईं। इसके साथ ही उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए सूर्य नमस्कार एवं ध्यान का अभ्यास भी कराया गया।
शिविर को बच्चों के लिए आनंदमय एवं रोचक बनाने हेतु प्रतिदिन विभिन्न मनोरंजक खेलों का आयोजन किया गया, जिनमें बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। प्रत्येक दिन के अंत में बच्चों को स्वादिष्ट नाश्ता एवं जलपान भी प्रदान किया गया। सात दिनों तक बच्चों में सीखने और सहभागिता का विशेष उत्साह देखने को मिला।
शिविर की समस्त गतिविधियाँ अध्यक्ष मधु मूंधड़ा के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुईं। समन्वयिका सौम्या मूंधड़ा एवं दिव्यांशी मूंधड़ा ने बच्चों के साथ अत्यंत स्नेहपूर्ण एवं मित्रवत व्यवहार रखते हुए शिविर को और अधिक रोचक बनाया। बच्चों को संस्कारपूर्वक "Aunty" के स्थान पर 'मईया' तथा बड़ी बहनों एवं समन्वयिकाओं को 'सखी' कहकर संबोधित करना सिखाया गया, जिससे उनमें अपनत्व, सम्मान एवं भारतीय संस्कृति के प्रति भावनात्मक जुड़ाव विकसित हुआ।
शिविर के अंतिम दिन सभी बच्चों को मंदिर ले जाया गया, जहाँ उन्होंने सामूहिक रूप से सीखे हुए श्लोकों एवं गीता पाठ का सुंदर प्रस्तुतीकरण किया। इसके पश्चात बच्चों को उनके उत्साह एवं सहभागिता के लिए प्रशंसा प्रमाण पत्र एवं उपहार प्रदान किए गए।
अंतिम दिन बच्चों द्वारा पक्षियों के लिए सुंदर बर्ड हाउस भी बनाए गए, जिन्हें उन्होंने अपने नाम दिए और अपनी छत पर रखने का संकल्प लिया। इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों को पक्षियों एवं अन्य जीवों के प्रति प्रेम और संवेदनशीलता का संदेश दिया गया।
यह सात दिवसीय संस्कार शिविर बच्चों के लिए अत्यंत शिक्षाप्रद, प्रेरणादायक एवं आनंदमय अनुभव सिद्ध हुआ।
झारखंड-बिहार प्रदेश के किशनगंज जिले में 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सात दिवसीय संस्कार शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का मुख्य उद्देश्य बच्चों को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान एवं उत्तम संस्कारों से जोडऩा था। शिविर में प्रतिदिन प्रार्थना, माला जाप, श्लोक उच्चारण एवं श्रीमद्भगवद्गीता के सरल पाठ का अभ्यास कराया गया। बच्चों को सनातन धर्म के संस्कार, बड़ों का सम्मान, अनुशासन, नम्रता तथा सभी जीवों के प्रति दया भाव रखने जैसी महत्वपूर्ण शिक्षाएं दी गईं। इसके साथ ही उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए सूर्य नमस्कार एवं ध्यान का अभ्यास भी कराया गया। शिविर को बच्चों के लिए आनंदमय एवं रोचक बनाने हेतु प्रतिदिन विभिन्न मनोरंजक खेलों का आयोजन किया गया, जिनमें बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। प्रत्येक दिन के अंत में बच्चों को स्वादिष्ट नाश्ता एवं जलपान भी प्रदान किया गया। सात दिनों तक बच्चों में सीखने और सहभागिता का विशेष उत्साह देखने को मिला। शिविर की समस्त गतिविधियाँ अध्यक्ष मधु मूंधड़ा के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुईं। समन्वयिका सौम्या मूंधड़ा एवं दिव्यांशी मूंधड़ा ने बच्चों के साथ अत्यंत स्नेहपूर्ण एवं मित्रवत व्यवहार रखते हुए शिविर को और अधिक रोचक बनाया। बच्चों को संस्कारपूर्वक "Aunty" के स्थान पर 'मईया' तथा बड़ी बहनों एवं समन्वयिकाओं को 'सखी' कहकर संबोधित करना सिखाया गया, जिससे उनमें अपनत्व, सम्मान एवं भारतीय संस्कृति के प्रति भावनात्मक जुड़ाव विकसित हुआ। शिविर के अंतिम दिन सभी बच्चों को मंदिर ले जाया गया, जहाँ उन्होंने सामूहिक रूप से सीखे हुए श्लोकों एवं गीता पाठ का सुंदर प्रस्तुतीकरण किया। इसके पश्चात बच्चों को उनके उत्साह एवं सहभागिता के लिए प्रशंसा प्रमाण पत्र एवं उपहार प्रदान किए गए। अंतिम दिन बच्चों द्वारा पक्षियों के लिए सुंदर बर्ड हाउस भी बनाए गए, जिन्हें उन्होंने अपने नाम दिए और अपनी छत पर रखने का संकल्प लिया। इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों को पक्षियों एवं अन्य जीवों के प्रति प्रेम और संवेदनशीलता का संदेश दिया गया। यह सात दिवसीय संस्कार शिविर बच्चों के लिए अत्यंत शिक्षाप्रद, प्रेरणादायक एवं आनंदमय अनुभव सिद्ध हुआ।
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